पहले के जमाने में लोग पेपर और पेन की मदद से लिखा करते थे लेकिन जब से तकनीक ने लोगों के जिंदगी में दस्तक ही है तब से लोगों का लिखने का रूख ही बदल गया है। अब यह काम कंप्यूटर और फोन की मदद से किया जा रहा है। अब लोग लिखते नही है बल्कि कंप्यूटर और फोन पर पर टाइप करते हैं। आपको तो पता ही है कि कई नौकरियों में तो लोग 10-12 घंटे तक लगातार की-बोर्ड पर अपनी उंगलियां घिसते रहते हैं लेकिन उनको इस बात की खबर नहीं है कि इससे उको किस तरह की बिमारीयों का सामना करना पड सकता है।
आपको बता दे कि हद से ज्यादा टाइपिंग करने की वजह से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। हद से ज्यादा टाईपिंग करने से आपको एक अजीब बीमारी हो सकती हैं। इस बीमारी को साढ़े तीन उंगलियों की बीमारी भी कहा जाता है। आप नाम सुनकर चौंक गए होंगे की ऐसी कौन-सी बिमारी जो जिसका नाम ऐसा अजीब सा है। इस बात को तो हम भी जानते है कि की-बोर्ड पर बहुत देर तक टाइपिंग करते रहने से उंगलियों में कई तरह की दिक्कतें आने लग जाती हैं।
कोई लगातार घंटों तक टाइपिंग करता ही रहता है तो उसकी कलाई, अंगूठा, अंगूठे के साथ वाली दो उंगलियों और तीसरी आधी उंगली में दर्द होने लग जाता है तो इसी कारण से इसको साढ़े तीन उंगलियों’ की बीमारी कहते हैं। हमारी कलाई में एक मिडियन नस होती हैं जिसके दब जाने से ही यह बीमारी होती है। वैसे तो वैज्ञानिक इसे कार्पल टनल सिंड्रोम कहते हैं। ये बीमारी उन युवाओं में ज्यादा पाई जाती है जो दिन भर अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर दिन भर उंगलिया चलाते हैं।
आपको बता दे कि हद से ज्यादा टाइपिंग करने की वजह से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। हद से ज्यादा टाईपिंग करने से आपको एक अजीब बीमारी हो सकती हैं। इस बीमारी को साढ़े तीन उंगलियों की बीमारी भी कहा जाता है। आप नाम सुनकर चौंक गए होंगे की ऐसी कौन-सी बिमारी जो जिसका नाम ऐसा अजीब सा है। इस बात को तो हम भी जानते है कि की-बोर्ड पर बहुत देर तक टाइपिंग करते रहने से उंगलियों में कई तरह की दिक्कतें आने लग जाती हैं।
कोई लगातार घंटों तक टाइपिंग करता ही रहता है तो उसकी कलाई, अंगूठा, अंगूठे के साथ वाली दो उंगलियों और तीसरी आधी उंगली में दर्द होने लग जाता है तो इसी कारण से इसको साढ़े तीन उंगलियों’ की बीमारी कहते हैं। हमारी कलाई में एक मिडियन नस होती हैं जिसके दब जाने से ही यह बीमारी होती है। वैसे तो वैज्ञानिक इसे कार्पल टनल सिंड्रोम कहते हैं। ये बीमारी उन युवाओं में ज्यादा पाई जाती है जो दिन भर अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर दिन भर उंगलिया चलाते हैं।



0 Comments